छोटा शहर बोरिंग शहर.

छोटे शहर का आदमी आदी होता है दरकिनार कर दिए जाने का. वो जब टीवी चलाता है तो दिल्ली मुंबई की खबरें आ रही होती हैं. जब वो घर से बाहर निकलता है तो वही नज़ारा हर रोज़ सामने होता है, वही बड़ा सा पेड़, वही संकरी गली, वही कुत्ता दुम हिलाता हुआ. बोरियत घर में बैठी रहती है दिनभर मूंगफली छीलती हुई, ज़िन्दगी चबाती हुई. छोटे शहर का आदमी छोटी दुनिया में रहता है. यहाँ बड़ी बड़ी बातें नहीं होतीं. यहाँ प्रधानमंत्री आके फीता नहीं काटते. यहाँ चक्काजाम और हड़ताल भी हलकी फुल्की होती हैं. किसी का रास्ता रोक के देख लीजिये. वो दूसरी गली से निकल जाएगा. हाईवे पे ट्रकों की कतार नहीं होती. एकाध ट्रक ढाबे से सामने मिल जाएगा बस. धूप में चारपाई बाहर बिछा के लेटे हुए लोग दिख जाएँगे.

शोर भी ज़रा कम होता है. आप बाहर निकल जाएँगे तो तेज़ी से हॉर्न बजाते हुए लड़के मोटरसाइकिल दौडाते दिख जाएँगे. बड़े शहर की तरह दिनभर एक मंद शोर कान में घर नहीं बनाएगा. घर में कुकर की सीटी चार कमरे दूर से सुनाई दे जाएगी.

कुकर में खिचड़ी या दलिया ही बन रहा होगा. कोई यहाँ पास्ता या गार्लिक ब्रेड खा के पेट नहीं भरता. चाइनीज यहाँ कभी कभार नाश्ते में खा लेते हैं. रोटी और दाल के बिना गुज़ारा नहीं है. हर चीज़ सस्ती है यहाँ. सीताफल या शरीफा जो दिल्ली में सौ रूपए का मिलता है यहाँ पांच दस में मिल जाए तो अचरज नहीं है. जान भी यहाँ सस्ती है. दिल्ली में बीच सड़क पे मर के देखिये. अगले दिन अंग्रेजी अखबार के मुख्य पृष्ठ पर सुर्खियों में होंगे. यहाँ मरेंगे तो पहले दिन अन्दर वाले पृष्ठ पे और उसके अगले दिन रफा दफा.

छोटे शहर वाले दिल्ली में आ के घबरा जाते हैं. एक जगह से दूसरी जगह जाने में दो-दो घंटे? इतने में छतरपुर से आदमी मउरानीपुर पहुँच जाये. बड़े शहर वाले छोटे शहर आ के घबरा जाते हैं. यहाँ के. ऍफ़. सी. नहीं है? मैकडोनाल्ड नहीं है? पित्ज़ा डिलीवरी नहीं है? फिर जीते कैसे हो भाई? घूमने कहाँ जाते हो? न समंदर है न क़ुतुब मीनार तो परिवार को ले के कहाँ जाते हो? वही पुराना घिसा पिटा होटल और वही एक तालाब. जो आज़ाद पंछी है वो छोटे शहर में आ के सिटपिटा जाता है. और जो आरामतलब है उसकी पौ बारह हो जाती है.

लोग छोटे शहर के फायदे गिनाते हैं पर बड़े शहरों में रह के ही पैसे छापते हैं. कभी सुना नहीं कि छपरा के मशहूर टीवी कलाकार की देश भर में ख्याति हुई. हां पर अब ज़माना बदल रहा है. सोशल मीडिया ने आपकी ख्याति को आपके जगह से अलग कर दिया है. और घुमंतू प्राणी तो छोटे शहर में भी घूम लेंगे. आस पास कुछ न कुछ तो होगा ही. वरना पैसे बचाइए और चल पड़िए झोला ले के. किसने रोका है आपको अपनी ज़िन्दगी रोमांचक बनाने से?

तो आप किस तरफ हैं? छोटा शहर या बड़ा शहर?

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6 comments

    • बू क्या पूरा का पूरा गैस टैंक आ रहा है. पर पैसे नहीं हों तो दिल्ली छतरपुर सब बराबर है.

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  1. शायद यह बात सत्य हो कि बड़े शहर का आदमी छोटे शहर को बोरिंग समझता है मगर यह जान लेना भी बहुत आवश्यक है की बड़े शहर में आकर आदमी की जिंदगी सिर्फ भाग दौड़ में बीत जाती है। समय नहीं होता अपने लिए और ना ही अपनों के लिए।शाम को घर लौट कर जय समझ नहीं आता कि आखिर आज क्या किया और क्यों किया क्यों भाग रहे हो क्या मिल रहा है सर, चंद गांधी ज्यादा उस किसान से जो थोड़ा कमाता जय दो रोटी खाता है और खुश है।

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    • ख़ुशी संतोष में है. अगर आप में संतोष नहीं है तो आप गाँव में किसानी कर के खुश नहीं रह पाओगे. और कभी कभी संतोष न करना भी अच्छा होता है. हाँ ये तो है की जगत मिथ्या है और बड़े शहरों के चोंचले ज्यादा हैं.

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