आज़मगढ़ वाले से चर्चा

एक आजमगढ़ वाले मिल गए थे. उनसे चर्चा हो गयी. चर्चा थोड़ी मजेदार थी इसलिए पेश कर रहा हूँ. उन्होंने मुझसे पूछा कि दांतों की सफाई का कितना लेते हो. मैंने कहा की निर्भर करता है. अगर काफी बुरे हाल हैं मुंह के तो डेढ़ हज़ार. उससे ज्यादा नहीं. आजमगढ़ वाले बुरा मान गए. दांत ही तो साफ करोगे. नया क्या है उसमें? पहाड़गंज में एक लंदन से आया डॉक्टर है. वो तो तीन सौ लेता है. दांत तो वो भी साफ़ करता है. मैंने कहा भाई करता होगा. 

इससे आजमगढ़ वाले शमशेर जी को बढ़ावा मिल गया. बोले मैं आपको एक बात बताता हूँ. मैंने सोचा कि न बताओ तो अच्छा होगा पर वो शुरू कर चुके थे. बोले मेरी आँख ख़राब है. चश्मे की ज़रूरत थी तो मैं खान मार्किट चला गया आँख चेक कराने. मैंने कहा अच्छा. वो बोले की खान मार्किट का तो आपको पता है. चेक करने के मांग रहा था मुझसे हजार. मैंने कहीं और चेक कराई थी. दो सौ में चेक होती है. और जब मशीन वही है, इंसान वही है तो पैसे ज्यादा क्यूँ? मैंने सुझाया की शायद मार्केट महंगा होगा. बोले की यही तो बात है. मार्किट ही महंगा है. हमारे आजमगढ़ में होता तो हम दो लप्पड़ देते. मैंने सोचा कि आजमगढ़ में होगा कोई रिवाज.

तो मैंने पूछा कि फिर आपने जांच कराई. बोले कि मैंने उससे बोल दिया कि मैं यहाँ के अटेंडर का ख़ास हूँ और पैसे नहीं दूंगा. स्साले ने ढंग से चेक ही नहीं किया. दवा भी नहीं लिखी. मेरा चढ़ गया पारा और मैं सुना आया कि तुम्हारी दूकान उठ जाएगी, तुम हो कलंक आदमी एकदम.

हुम्म की आवाज़ निकाल के मैंने सांस भरी के अब चुप होंगे, तब चुप होंगे. पर शमशेर भैया चालू रहे. बोले ऐसा ही एक और डॉक्टर मिला. हम चेक करने गए जनरल और हमसे बोलता है कि तुम शराब तो नहीं पीते, आँख क्यूँ चढ़ी हुई है? हमको भी गुस्सा आ गया और कह दिया की खुद ब्लड चेक कर ले बेवक़ूफ़. अटकल क्यूँ लगता है. फिर कहने लगा तुम गुटखा तो नहीं खाते. हमारा मन तो हुआ कालर पकड़ के झिंझोड़ दें की हमपे झूठा इल्जाम लगता है. मेरा मन हुआ की बोल दूँ की शायद रूटीन सवाल होंगे पर मैंने अकल नहीं लगाई.

आजमगढ़ वाले भैया अभी भी बोल रहे थे. बोले हमसे दांत के पहाड़गंज के डाक्टर ने कहा की तीन सौ में दांत निकालेगा. हमसे होशियारी कर रहा था. हम गाँव के डाक्टर के पास गए और पचास रुपया फेंका. डाक्टर ने दांत तो निकाला ही, और दवा दी अलग. मेरा मन हुआ कि सर धुन लूँ. पर सुनता रहा. क्यूंकि मैं सबकी सुन लेता हूँ.

फिर मैंने पूछ ही लिया की आपलोग डाक्टर को किसी लफंटर की तरह समझते हो. डाक्टर इतना पढ़ के आया है तो कभी इज्ज़त दे दिया करो थोड़ा. आजमगढ़ वाले भैया का चेहरा संजीदा हो गया. बोले कि ऐसा नहीं है. पर सब साले लूटते हैं. हमारे गाँव में स्कूल है. वहां हमारे लड़के पढ़ते हैं. स्कूल के प्राचार्य को कोई काम नहीं है तो हर हफ्ते मिलन समारोह करवाते रहते हैं और बच्चों से समारोह का चंदा ले ले के समोसा खाते रहते हैं. पैरेंट – टीचर मीटिंग होती है जिसमे खाली खीखी करके हँसते हैं और समोसा खाते हैं. हमारी बीवी है सीधी तो वो बस हो के आ जाती है. एक बार उसे कहीं जाना था तो गलती कर दी. हमें भेज दिया. हम चले गए. प्राचार्य ने अच्छा भाषण दिया. ख़तम होने पे तालियाँ बजीं. फिर हमने हाथ उठा के बोला के क्या हम कुछ बोल सकते हैं?

प्राचार्य जी सटपटा गए पर बोले हां हां क्यूँ नहीं. हम खड़े हो के बोले कि ये जो सब तुम लोगों ने तमाशा लगा रखा है. इसकी जगह अगर तुम बच्चों को पढ़ाने में ध्यान देते तो क्या हो जाता? सब सकपका गए. हमने बोला कि ये जो चंदा लेने का नाटक है, उसकी जगह तुम ढंग का काम करो कायदे से. फिर हमने बोला कि तुम्हारी ये शिक्षिकाएं हैं, इनसे ज्यादा फूहड़ कोई नहीं है. क्लास में बैठ के फ़ोन पे पटर पटर करती रहती हैं. अभी मैं एक सवाल पूछूं तो सब में से कोई नहीं बता पाएगा. है हिम्मत? मेरा चैलेंज है. अगर हार गया तो फीस भी भरूँगा और अपने बच्चे भी ले जाऊंगा. सारी टीचर सकते में आ गयीं. सबकी समोसा, चाय पार्टी में विघ्न आ गया और पूरा माहौल कड़वा हो गया. पर आप ही बताइए, क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ?

मैंने उनकी आँख में आँख डाल के कहा कि आपने एकदम सही किया. ऐसे ही हमारी शिक्षा व्यवस्था में भुस भरते रहा करिए. फिर मैंने खुद सोचा कि जब ये डाक्टरों में भुस भरते हैं तो मुझे बोलने का हक़ है क्या? विचारणीय है कि हर मामला अलग होता है. कहीं कहीं संस्था या स्टाफ की गलती है और कहीं आम इंसान की. आप पूरा सिस्टम नहीं बदल सकते. बस जहाँ गलती दिखे वहां भुस भरते चलिए. हां अगर आप डाक्टर से बदतमीजी करेंगे तो वो गलत होगा. किसी से भी बदतमीजी नहीं. अपनी बात रखना बुरा नहीं पर ज़बान संभाल कर.

इस सब से कोई ताल्लुक नहीं है पर एक और बात भी उन्होंने बताई तो वो भी बता रहा हूँ. बोल रहे थे कि पैसे कमाने के तरीके हैं बहुत सारे. एक तरीका है पेट्रोल पंप वालों का. क्या करते हैं कि आपसे कहेंगे के मीटर देखिये और अपना पेट्रोल का पाइप दबा के छोड़ देंगे. पेट्रोल खटाक से रुक जाएगा पर मीटर चलता रहेगा. आप मीटर देखते रहेंगे कि वाह भाई क्या ईमानदारी से पेट्रोल आ रहा है. फिर जैसे ही मीटर स्लो होगा, फिर से हल्का झटका दे के छोड़ देंगे तो पेट्रोल जाएगा कम पर मीटर चल जाएगा तेज. ऐसे कर के एकाध लीटर पेट्रोल बचा लेते हैं जिसपे मिलता है कमीशन.

मैंने कहा वाह भैया आजमगढ़ वाले, क्या बात बताई. अब से हम भी ध्यान रखेंगे.

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