इडली बनाम भटूरा

दक्षिण भारत में नाश्ता काफी महत्वपूर्ण है. उत्तर में भी है. उत्तर भारत में नाश्ते का महत्वपूर्ण रोल है आपको हृदयघात दिलाने में. हां नहीं तो. दिल्ली में जबसे आया हूँ, ढंग का पोहा नहीं खाया. एक तो ये शहर आलसी इतना है. सवेरे कोई उठता नहीं है. कोई नाश्ते के ठेले नहीं लगते. ग्यारह बजे से तो शहर जागना शुरू करता है और शुरू करता भी है तो किस से? तेल भरे परांठे, कुलचे, कचोड़ी, समोसे और छोले. हल्का नाश्ता नाम की चीज़ यहाँ किसी की समझ नहीं आती. क्या मतलब आप साठ की उम्र में हार्ट अटैक से नहीं मरना चाहते? अरे थोड़ा मक्खन और लीजिये तेल वाले परांठे पे. इसके बाद मलाई मार के लस्सी लीजिये.

दावणगेरे में जब मैं था तो हम सवेरे उठ के इडली खाते थे, डोसा खाते थे. कम से कम तेल, वसा वाला नाश्ता. और पोहे जैसी और चीज़ें होती थीं जैसे अवलकी और मंडकी. ग्वालियर में पोहा मिल जाता था. खाते वहां भी हैं सवेरे सवेरे पूरी-सब्जी, बेड़ई और समोसे पर कम से कम विकल्प तो होता है. दिल्ली में आप खाएंगे तो भठूरे ही. कैसे नहीं खाएंगे? ढूंढ कर दिखा दीजिये एक भी पोहे का ठेला या सस्ती इडली डोसे का स्टाल. हल्का खाना खाना है तो महंगा मिलेगा और गारंटी से उसमे वो स्वाद नहीं होगा. मैं दिल्ली के मैं कोर्स को कुछ नहीं कह रहा क्यूंकि नान और बटर पनीर मसाला काफी स्वादिष्ट होते हैं. बिरयानी भी यहाँ धमाकेदार मिलती है. पर मतलब पोहे का कुछ करो यार.

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