लघुकथा – परफेक्ट प्रेम कथा की ऐसी की तैसी

एक और कहानी बिखरने के बारे में. जुड़ने के बारे में. और आपके बारे में.

‘तुमने मुझे मोटी कहा?’ रिया बोली. उसकी आँखों में हल्का गुस्सा, हलकी शरारत थी. उसे उतना फर्क नहीं पड़ता था की कोई उसे मोटी या पतली, काली या गोरी कहे पर उसे प्रगल्भ को छेड़ने में बड़ा मज़ा आता था.

प्रगल्भ सकपका कर रह गया. बोला, “नहीं मेरा मतलब वो नहीं था.”

“मतलब वो नहीं था…” रिया ने नाक सिकोड़ कर प्रगल्भ की बात को दोहराया. और हँस कर उसको चिल करने बोली. प्रगल्भ हँस दिया. उसने रिया जैसा कोई देखा नहीं था. लड़कियां उसको बोरिंग लगती थीं. घूम फिर कर हर लड़की एक ही बात करने लग जाती है ऐसा उसका सोचना था. वही फीलिंग्स, या फिर कोई सिली सा टॉपिक. रिया अलग थी. वो ये सोच ही रहा था कि ऑमलेट खाती रिया ने भरे मुंह से पुछा – ये प्रगल्भ कैसा नाम है. नाम लेने से ही मुंह का खाना बाहर आ जाता है.

प्रगल्भ ने रिया को झिड़का. “ढंग से खाओ, लोग देख रहे हैं.”

रिया ने आस पास देखा तो कैंटीन में दीपा, रचना और अमित के गैंग ने एंट्री ली थी. “अच्छा जी, अब हमारे साथ क्यूँ बैठेंगे आप. कॉलेज का कूल गैंग जो दिख गया है,” वो बोली.

प्रगल्भ को बुरा लगा. “नहीं यार. तुम मुझे हंसा रही थी और कैंटीन का छोटू तुम्हे घूर रहा था.”

“तो उसको डांटते, मुझपे क्यूँ…”

प्रगल्भ को अपनी गलती का एहसास हुआ. पर रिया ने अपना वाक्य ख़त्म किया, “झल्लाते रहते हो. घर की मुर्गी हूँ न.”

प्रगल्भ ने चम्मच से अपनी प्लेट से पोहा उठा के रिया के मुंह में ठूंस दिया. “बस चुप अब.”

रिया मुस्कुरा तो दी थी पर उसको पता था कि ये प्रेम कहानी कहीं नहीं जाएगी. प्रगल्भ उसके टाइप का लड़का था ही नहीं.

ये तब था. और ये अब है.

कल रिया की शादी है. प्रगल्भ की शादी को दो साल हुए. जब प्रगल्भ की शादी हुई तो रिया ने दो महीने पहले फ़ोन किया था. “शादी कर रहे हो?”

“हां किसी से तो करनी पड़ेगी न. तुम तो करोगी नहीं. बोलो करोगी?”

“यार, अब इतना कुछ होने के बाद…”

“आई नो यार, मजाक कर रहा हूँ,” प्रगल्भ बोला.

“चलो, शादी की बधाई. मैं तो नहीं आउंगी. आई तो ड्रंक हो के हंगामा ही करुँगी.”

“मुझे नार्मल शादी चाहिए इसलिए तुम्हे बुलाऊंगा ही नहीं.”

“ऐसा क्या है उस चुड़ैल में जो मुझमे नहीं है…”

“हाहा फ़िल्मी कहीं की. चलो अब मुझे जाना है.”

“प्रगल्भ!”

“हां जल्दी बोलो रिया…”

“कुछ नहीं”

“ओके फिर बाय.”

“प्रगल्भ यार…”

“रिया यार…”

“कितना अच्छा होता न अगर हम झगड़े न होते, और ये सब कुछ न हुआ होता. मुझे वापस तुम्हारे घर की मुर्गी बनना है…”

प्रगल्भ ने फ़ोन पे सांस भरी. उसको रिया को बताने का मन नहीं था पर रिया उसके टाइप की लड़की थी ही नहीं. रिया बोली, “चलो जो भी है. अब मैं बात नहीं किया करूँगी तुमसे. वरना तुम्हारी चुड़ैल बीवी जलेगी.”

“ठीक है फिर,” प्रगल्भ इतना ही कह पाया. थोड़ी देर एक दूसरे की साँसे सुनके दोनों ने फ़ोन रख दिया.

वो तब था और ये अब है.

आज रिया की भी शादी है. लड़का बहुत बड़ा बिजनेसमैन है. रिया फ़ोन को देख रही है. कुछ अधूरा सा लग रहा है. फिर जैसे उसकी नज़र से घबरा कर, फ़ोन बज उठा.

“रिया ने नंबर से ही पहचान लिया था.”

“और कैसे हो किसी और के बच्चों के बाप?”

“सही हूँ, किसी और की होने वाली बीवी!”

दोनों हँस दिए.

“तुम अब भी मोटी हो न?”

“अपने पैसे का खा के मोटी हुई हूँ, तुम्हे क्या है?”

“अरे मैं तो इसलिए पूछ रहा था कि अगर अब पतली हो गयी होती तो मुझे पछतावा होता तुम्हे छोड़ने का.”

“नहीं, अब भी मोटी हूँ. खुश हो जाओ.”

“नहीं हो पा रहा”

फिर खामोशी पसर गयी. थोड़ी देर एक दूसरे की साँसे सुनकर दोनों ने फ़ोन रख दिया. रिया को याद आया अपने ब्रेकअप वाला दिन. रिया ने प्रगल्भ को बोला था कि वो उसको प्यार तो करती है पर शादी नहीं कर सकती. बड़ा चिल्लाया था प्रगल्भ पहले तो. थोड़ी देर की लड़ाई के बाद रिया ने कोई जोक बोला था और दोनों हँस पड़े थे.

“मुझे माफ़ कर दोगे न? यार मुझे ये नहीं चाहिए की जब मैं तुमसे शादी करूँ उसके बाद भी मुझे दूसरे लड़कों के लिए फीलिंग्स आएं. तुम समझ रहे हो न?”

“हां तुम सही हो. अगर तुम श्योर नहीं हो तो ब्रेकअप ही ठीक है. पर एक वादा करोगी?”

“बोलो?”

“अगले जनम में पक्का.”

“ओके”

वो तब था. और ये आज है.

 

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