बेतरतीब बिखरी बातें

बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत में झाँकने पर इने गिने महाराजा और उनके किस्से मिलते हैं. बाकी राजाओं ने आपस में लड़ के ऐसे ही टाइमपास कर लिया. कोई बड़ा काम नहीं किया. यहाँ तक की खजुराहो के खूबसूरत मंदिरों के अलावा कोई ऊंची क्वालिटी का कंस्ट्रक्शन भी नहीं किया जिसके भरोसे उन्हें याद रखा जा सके. अशोक, चन्द्रगुप्त मौर्य और अकबर जैसे बड़े राजाओं की यहाँ नज़र कम ही पड़ी. 

पता नहीं क्या कारण है कि हिंदुस्तान के केंद्र में होने के बावजूद यहाँ पर केंद्र सरकार का ध्यान नहीं जाता. रेलगाड़ी से ले कर बस तक यहाँ पहुँचने में सब आनाकानी करते हैं. ऐसा नहीं है कि इतिहास ने इस क्षेत्र को छुआ ही नहीं. महोबा के आल्हा उदल मशहूर हैं, पन्ना, कलिन्जर, छतरपुर, अजयगढ़, टीकमगढ़, चरखारी, बिजावर में ऐतिहासिक इमारतें हैं, पुरानी बातें हैं पर सब बेतरतीब बिखरी हुई हैं.

राजस्थान के किलों के साथ अच्छी बात ये है की ये एक तो काफी बड़े हैं और दूसरा इनकी ब्रांडिंग बड़ी अच्छी की गयी है. गाइड मिल जाता है, आस पास एडवेंचर स्पोर्ट्स करने का इंतजाम है और रख रखाव भी अच्छा है. बुंदेलखंड में बला की खूबसूरत जगहें हैं पर आस पास गाइड के नाम पर भेड़ चराता हुआ हुआ चरवाहा है, लोगों ने दीवारों पर पान की पीकें थूकी हुई हैं, लोग पिकनिक करने आते हैं और कचरा फेंक जाते हैं.

सालों से सब ऐसा ही है. छतरपुर में महल हैं जो कायदे से ऐतिहासिक धरोहर और दर्शनीय स्थल होना चाहिए, पर उसकी दीवारें भरभरा कर गिर रहीं हैं और लोग शायद इंतज़ार कर रहे हैं की पूरी गिर जाएं तो यहाँ शौपिंग काम्प्लेक्स खोला जाये.

हम मध्य प्रदेश में रह कर और राजाओं के बारे में ज्यादा जानते हैं और राजा भोज और राजा छत्रसाल के बारे में कम. कभी अगर हमारा इतिहास जागेगा तो शायद यह हिसाब देना मुश्किल होगा

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